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Delhi Air Pollution: एक नहीं है स्मॉग और फॉग, जानें इसमें अंतर और सेहत पर इनके हानिकारक प्रभाव
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Delhi Air Pollution: एक नहीं है स्मॉग और फॉग, जानें इसमें अंतर और सेहत पर इनके हानिकारक प्रभाव 1

Delhi Air Pollution ठंड के आते ही दिल्ली एवं मुंबई और उसके आसपास के क्षेत्र में प्रदूषण के कारण कोहरा, धुंध, और स्मॉग लोगों को परेशान करने लगता है. ऐसे में इलाके में प्रदूषण का स्तर बढ़ने से लोगों को गले में खराश और खांसी जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं. लेकिन आखिर प्रदूषण का सेहत से इस तरह का संबंध कैसे बन जाता है. क्या यह शरीर पर बुरा असर भर है या फिर शरीर के प्रतिरोधतंत्र की प्रतिक्रिया है जिसके जरिए शरीर प्रदूषण के दुष्प्रभाव से निपटने का काम करता है. इन सवालों का जवाब में ऐसा हालात में क्या करना चाहिए और किस तरह की सावधानी बरतनी चाहिए यह बताता है.

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली

Delhi Air Pollution:

दिल्ली समेत पूरा एनसीआर इस समय धुंध की चादर से ढका हुआ है। नवंबर की शुरुआत के साथ ही हल्की ठंड भी शुरू हो चुकी है। ऐसे में बढ़ती धुंध ने लोगों के लिए परेशानी का सबब बन चुकी है। ठंड की आहट के साथ ही राज्य में प्रदूषण भी बढ़ने लगा है। जहरीली होती हवा में अब लोगों का दम घुटने लगा है। हालांकि, अभी भी लोग इस बात को लेकर कंफ्यूज हैं कि आखिर हवा में फैली यह चादर फॉग है या स्मॉग। अगर आप भी इस बात को लेकर कंफ्यूज हैं, तो आज अपने इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताएंगे फॉग और स्मॉग में क्या अंतर है और कौन सेहत के लिए हानिकारक है?

एक साथ कई समस्याएं :

प्रदूषण के दुष्प्रभावों के बारे में लोगों मोटे तौर पर यही जानते हैं कि इससे हमारे फेफड़ों पर बुरा असर होता है, हमारे दिल और पूरी सेहत पर बुरा ही असर डालता है. आमतौर पर जब भी प्रदूषण के स्तर बढ़ते देखे गए हैं, लोगों को छींक, खासी, सांस लेने में तकलीफ और गले में खराश जैसी समस्याएं बढ़ने लगती हैं. कई लोगों को तो आखों में भी समस्याएं देखने को मिलती है.

स्मॉग से बचने के लिए अपनाएं ये तरीके–

पर्यावरण में बढ़ते स्मॉग के बीच सेहत का ख्याल रखना बेहद जरूरी है। ऐसे में आप अमेरिकन लंग असोसिएशन के बताए टिप्स से खुद को खराब गुणवत्ता वाली हवा में भी सुरक्षित रख सकते हैं।

  • Delhi Air Pollution का स्तर ज्यादा होने पर घर से बाहर व्यायाम करने से बचें। जब हवा खराब हो, तो वर्कआउट घर के अंदर ही करें।
  • अपने घर में एनर्जी का कम इस्तेमाल करें। ज्यादा बिजली और एनर्जी के अन्य स्रोतों का इस्तेमाल वायु प्रदूषण को बढ़ाता है।
  • एयर पॉल्युशन को कम करने के लिए निजी वाहन की वजह पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करें। इसके अलावा पैदल चलकर या कारपूल को इस्तेमाल भी कर सकते हैं।
  • ज्यादा समय तक बाहर रहने से बचें। खासकर सुबह और शाम के समय जब प्रदूषण अपने पीक पर हो, घर के अंदर ही रहें।
  • अगर आप बाहर जा रहे हैं, तो हाई क्वालिटी वाले मास्क जैसे N95 या N99 का इस्तेमाल करें, ताकि हानिकारक प्रदूषकों को फिल्टर करने में मदद मिले।
  • घर के खिड़की-दरवाजों बंद रखें, ताकि प्रदूषित हवा घर के अंदर न आ पाए। साथ ही घर से Delhi Air Pollution को हटाने के लिए एयर प्यूरिफायर का इस्तेमाल करें।

संक्रमण की अनुकूलता

सामान्य तौर पर समझें तो प्रदूषण, खास तौर पर जब हवा में पार्टिकुलेट मैटर की मात्रा अधिक होने से उसमें संक्रामक कणों के प्रवाह की अनुकूलता बढ़ जाती है. वहीं मौसम बदलने का समय भी होता है जब लोगों में सर्दी जुकाम अधिक होता है. जिसके संक्रमण की संभावना को प्रदूषण और बल देता है.

Delhi Air Pollution: एक नहीं है स्मॉग और फॉग, जानें इसमें अंतर और सेहत पर इनके हानिकारक प्रभाव

कैसे होने लगता है असर

संक्रमण या खराब हवा का प्रभाव सबसे पहले बाहरी अंगों पर अधिक होता है जिसमें आंख तो शामिल है ही, लेकिन सांस के जरिए फेफड़े, नाक, मुंह और गला सबसे जल्दी प्रभावित होते हैं. ये संक्रमामक कण, और धूल के गले और नाक में पहुंचने से शरीर उसे गौर जरूरी और हानिकारक पदार्थ मान कर उससे बाहर करने की प्रक्रिया शुरू कर देता है जिससे गले और नाक में म्यूकस बनने लगता है.

क्या है फॉग?

फॉग, जिसे हिंदी में कोहरा भी कहा जाता है, आमतौर पर ठंड में मौसम में देखने को मिलता है। सर्दियों में अक्सर आसमान में कोहरा यानी फॉग छाया रहता है। फॉग हवा में मौजूद पानी की बेहद छोटी-छोटी बूंदें होती हैं, जिनका रंग सफेद होता है। आसमान में मौजूद कोहरे की वजह से अक्सर सर्दियों में पूरी जगह सफेद चादर नजर आती है, जिसकी वजह से विजिबिलिटी कम हो जाती है। हालांकि, यह सेहत के लिए हानिकारक नहीं होता और न ही इसकी वजह से सांस लेने में कोई तकलीफ होती है, लेकिन कोहरे की वजह से ठंड ज्यादा लग सकती है।

पराली भी है एक वजह

पंजाब में हर साल इस समय एक करोड़ 80 लाख टन भूसा खेतों में जला दिया जाता है, लेकिन ये कानूनन जुर्म है. पंजाब सरकार ने इस तरह भूसा जलाने वाले किसानों के लिए सजा तय कर रखी है. पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक हर साल किसानों को इसके लिए जागरूक किया जाता है लेकिन उसका खास असर नहीं होता. नासा की रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा में हर साल जलाई जाने वाली पराली की वजह से और हवा की गति में गिरावट से एयर लॉक के हालात हो जाते हैं. यानी इससे होने वाला प्रदूषण स्मॉग में बदल जाता है.

Disclaimer: लेख में उल्लिखित सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य सूचना के उद्देश्य के लिए हैं और इन्हें पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। कोई भी सवाल या परेशानी हो तो हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें।

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